🤔 Transit Insurance क्या है और यह क्यों ज़रूरी है?
जब आप अपना कीमती सामान (Household Goods, Office Equipment, or Commercial Cargo) एक शहर से दूसरे शहर भेजते हैं, तो रास्ते में हज़ारों किलोमीटर का सफर होता है। भारतीय सड़कों की स्थिति, अचानक मौसम का बदलना, और हाइवे (Highways) पर होने वाले हादसों के बारे में हम सभी जानते हैं। Sona Packers and Movers की टीम हमेशा आपके सामान की बेहतरीन और सुरक्षित पैकिंग करती है, लेकिन कुछ अनहोनी (Unforeseen Circumstances) ऐसी होती हैं जिन पर किसी इंसान का बस नहीं चलता (जैसे ट्रक का एक्सीडेंट होना, आग लगना, या प्राकृतिक आपदा)।
इन्हीं अप्रत्याशित जोखिमों (Risks) से आपके आर्थिक नुकसान (Financial Loss) को बचाने के लिए Transit / Cargo Insurance या ROV (Risk of Value) Insurance लिया जाता है। आसान भाषा में समझें तो—आप अपने सामान की एक वैल्यू (कीमत) घोषित करते हैं, और इंश्योरेंस कंपनी उस सामान की सुरक्षा की गारंटी लेती है। यदि रास्ते में सामान को कोई नुकसान पहुँचता है, तो कंपनी आपके नुकसान की भरपाई (Claim Payout) करती है, ताकि आपकी जेब पर अचानक कोई भारी बोझ न पड़े।
✅ पॉलिसी में क्या-क्या कवर होता है? (Covered Risks)
इंश्योरेंस पॉलिसी की शर्तों (Terms & Conditions) के अनुसार, ट्रांजिट इंश्योरेंस आपके सामान को कई तरह के गंभीर जोखिमों से सुरक्षा प्रदान करता है। आइए विस्तार से समझते हैं कि किन परिस्थितियों में आपको क्लेम का पूरा फायदा मिलता है:
📦 पार्सल का खो जाना (Loss)
यदि ट्रांजिट के दौरान आपका कोई बॉक्स, कार्टन या पूरा का पूरा कंसाइनमेंट (Consignment) ही रास्ते में कहीं खो जाता है (Non-delivery), तो इंश्योरेंस कंपनी उस गायब हुए सामान की पूरी घोषित कीमत (Declared Value) का भुगतान करती है।
💥 दुर्घटना से नुकसान (Accidental Damage)
सफर के दौरान यदि लोडिंग या अनलोडिंग करते समय, या रास्ते के भारी झटकों की वजह से आपके फ्रिज, टीवी या फर्नीचर में कोई बड़ी टूट-फूट हो जाती है, तो उसे 'एक्सीडेंटल डैमेज' मानकर क्लेम पास किया जाता है।
🔥 आग लगना (Fire Hazard)
कई बार शॉर्ट-सर्किट या हाइवे पर अत्यधिक गर्मी के कारण ट्रक में आग लग जाती है। आग लगने से जले हुए या नष्ट हुए सभी सामान का 100% नुकसान इंश्योरेंस कंपनी द्वारा कवर किया जाता है।
🚛 वाहन का पलटना (Overturning/Collision)
यह हाइवे पर सबसे आम घटना है। अगर सामान ले जा रहा ट्रक किसी दूसरे वाहन से टकरा जाता है (Collision), गड्ढे में गिर जाता है, या सड़क पर पलट जाता है, तो इस भयानक स्थिति में हुए सारे नुकसान की भरपाई पॉलिसी से होती है।
🦹 चोरी या डकैती (Theft/Robbery)
यदि आपने कॉप्रिहेंसिव पॉलिसी (Comprehensive Policy) ली है, और रास्ते में बदमाशों द्वारा ट्रक से सामान लूट लिया जाता है या चोरी हो जाता है (जिसकी पुलिस FIR दर्ज होती है), तो वह नुकसान भी पॉलिसी के दायरे में आता है।
✂️ आंशिक नुकसान (Partial Damage)
यदि आपका पूरा सामान नहीं टूटा, बल्कि किसी मशीन का एक पार्ट डैमेज हो गया, या टीवी की सिर्फ स्क्रीन क्रैक हुई है, तो उसे आंशिक नुकसान कहते हैं। यदि आपकी पॉलिसी इसे कवर करती है, तो रिपेयरिंग का खर्च कंपनी उठाती है।
📝 क्लेम कैसे होता है? (Step-by-Step Claim Process)
ईश्वर न करे, लेकिन यदि आपके सामान को रास्ते में कोई क्षति पहुँचती है, तो घबराने की ज़रूरत नहीं है। अगर आपने सही प्रक्रिया (Process) का पालन किया, तो क्लेम का पैसा बहुत आसानी से मिल जाता है। यहाँ क्लेम लेने का चरण-दर-चरण (Step-by-Step) तरीका बताया गया है:
Step 1: तुरंत सूचना दें (Immediate Intimation): सामान उतारते समय जैसे ही आपको डैमेज दिखे, 24 से 48 घंटे के भीतर ट्रांसपोर्टर (Sona Packers) और इंश्योरेंस कंपनी दोनों को लिखित में (Email/Letter) सूचना दें। देरी करने पर क्लेम रिजेक्ट हो सकता है।
Step 2: सबूत जमा करें (Gather Evidence): टूटे हुए सामान और डैमेज हुए कार्टन की साफ़ फोटो (Photos) और वीडियो (Videos) बनाएँ। जब तक सर्वेयर (Surveyor) न आ जाए, डैमेज हुए सामान या उसकी पैकिंग को फेंकें नहीं।
Step 3: क्लेम फॉर्म भरें (Fill Claim Form): इंश्योरेंस कंपनी से आधिकारिक क्लेम फॉर्म (Official Claim Form) लें, उसमें नुकसान की पूरी जानकारी और कीमत भरें, और उस पर अपने हस्ताक्षर (Sign) करें।
Step 4: सर्वेयर का निरीक्षण (Surveyor Inspection): बड़े नुकसान के मामले में, इंश्योरेंस कंपनी एक स्वतंत्र सर्वेयर (Independent Surveyor) को आपके घर भेजती है। वह आकर नुकसान का मुआयना करेगा और अपनी रिपोर्ट बनाएगा। आपको सर्वेयर के साथ पूरा सहयोग करना होता है।
Step 5: क्लेम सेटलमेंट (Claim Payout): सर्वेयर की रिपोर्ट और आपके द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद (आमतौर पर 15 से 30 दिनों के भीतर), इंश्योरेंस कंपनी स्वीकृत राशि (Approved Amount) सीधे आपके बैंक खाते में ट्रांसफर कर देती है।
📁 क्लेम के लिए ज़रूरी दस्तावेज़ (Mandatory Documents)
कोई भी इंश्योरेंस कंपनी बिना पक्के कागज़ात के क्लेम पास नहीं करती। क्लेम फाइल करते समय आपको नीचे दिए गए दस्तावेजों की एक फाइल तैयार करनी होगी:
- 📄 Insurance Policy / Certificate: आपकी मूल इंश्योरेंस पॉलिसी की कॉपी।
- 📋 Duly Filled Claim Form: कंपनी द्वारा दिया गया और आपके द्वारा भरा गया फॉर्म।
- 🧾 LR / GR / AWB / Bilty: ट्रांसपोर्टर की बिल्टी (Lorry Receipt) या कूरियर की रसीद।
- 💵 Invoice / Purchase Bill: सामान की कीमत साबित करने के लिए उसका ओरिजिनल खरीद बिल (Invoice)।
- 📦 Packing List: कौन से डिब्बे में क्या रखा है, उसकी पूरी सूची।
- 🚚 E-Way Bill: कमर्शियल सामान के लिए, यदि लागू हो (If Applicable)।
- 📝 Damage Certificate: ट्रांसपोर्टर द्वारा जारी किया गया डैमेज/शॉर्टेज सर्टिफिकेट।
- 📸 Damage Photographs: टूटे हुए सामान और ट्रक की तस्वीरें (Photos & Videos)।
- 🚓 Police FIR: यदि मामला चोरी (Theft), डकैती या बड़े एक्सीडेंट का है, तो पुलिस रिपोर्ट।
- 🏦 Bank Details & KYC: क्लेम का पैसा लेने के लिए Cancelled Cheque और वैलिड KYC दस्तावेज़ (जैसे PAN Card, `[Aadhaar Redacted]`, या GST Certificate यदि लागू हो)।
⚠️ ध्यान रखें (Crucial Rules to Remember)
इंश्योरेंस लेते समय कुछ ऐसी बातें होती हैं जिन्हें अक्सर ग्राहक नज़रअंदाज़ कर देते हैं, और बाद में उनका क्लेम पास नहीं हो पाता (Claim Rejection)। इन नियमों को हमेशा याद रखें:
1. Declared Value (घोषित मूल्य) का गणित:
यह इंश्योरेंस का सबसे महत्वपूर्ण नियम है। मान लीजिए आपके टीवी की असली कीमत ₹50,000 है, लेकिन प्रीमियम (Premium) के पैसे बचाने के लिए आपने फॉर्म में उसकी 'Declared Value' मात्र ₹20,000 लिख दी। अब रास्ते में अगर आपका टीवी पूरी तरह टूट जाता है, तो इंश्योरेंस कंपनी आपको 50 हज़ार नहीं देगी! आपका क्लेम केवल उसी घोषित मूल्य (₹20,000) तक ही सीमित रहेगा। इसलिए हमेशा सामान की सही और वास्तविक कीमत ही डिक्लेयर करें (Under-insurance से बचें)।
2. खराब पैकिंग (Poor Packaging):
इंश्योरेंस कंपनी की शर्तें बहुत स्पष्ट होती हैं। यदि सर्वेयर को लगता है कि सामान इसलिए टूटा क्योंकि उसे एक पुराने, कमजोर डिब्बे में बिना बबल रैप के पैक किया गया था (यानी कस्टमर ने खुद लापरवाही से पैकिंग की थी), तो क्लेम सीधा अस्वीकार (Reject) हो जाएगा। इसीलिए हमेशा Sona Packers and Movers जैसे प्रोफेशनल पैकर्स से ही पैकिंग करवानी चाहिए।
3. प्रतिबंधित सामान (Restricted Items):
इंश्योरेंस कभी भी कैश (Cash), सोने-चांदी के गहनों (Jewelry), लिक्विड या ज्वलनशील पदार्थों (Flammable Liquids), या सड़े-गले खाने के सामान (Perishables) पर लागू नहीं होता। अगर आप इन चीज़ों को छुपाकर भेजते हैं और नुकसान होता है, तो पॉलिसी उल्लंघन के कारण क्लेम रद्द हो जाएगा।
🚚 Sona Packers and Movers के साथ शिफ्टिंग क्यों सेफ है?
हम सिर्फ आपका सामान ही पैक नहीं करते, बल्कि आपकी चिंताओं (Worries) को भी हमेशा के लिए पैक कर देते हैं। हम आपको प्रतिष्ठित इंश्योरेंस कंपनियों से वैलिड (Valid) ट्रांजिट इंश्योरेंस प्रोवाइड करते हैं। हमारी 100% पारदर्शी पॉलिसी के तहत, हम क्लेम फाइल करने से लेकर सेटलमेंट होने तक कदम-दर-कदम आपका पूरा साथ देते हैं। हमारी 4-लेयर प्रीमियम पैकिंग इतनी मजबूत होती है कि 99% मामलों में इंश्योरेंस क्लेम की नौबत ही नहीं आती!
⚖️ Transit Insurance vs. All Risk Insurance (अंतर समझें)
अब तक आपने समझा कि इंश्योरेंस क्यों ज़रूरी है। लेकिन सबसे बड़ा कन्फ्यूज़न यह होता है कि "कौन सा इंश्योरेंस लिया जाए?" शिफ्टिंग इंडस्ट्री (Packers and Movers Industry) में मुख्य रूप से दो प्रकार की इंश्योरेंस पॉलिसियां काम करती हैं: 1. Basic Transit Insurance (ROV) और 2. All Risk / Comprehensive Insurance। ग्राहक अक्सर दोनों को एक ही समझ लेते हैं, जिससे क्लेम के समय विवाद पैदा होता है। आइए इन दोनों के बीच के तकनीकी अंतर (Technical Difference) को विस्तार से समझते हैं।
1. Basic Transit Insurance (केवल बड़ी दुर्घटनाओं के लिए)
इसे ROV (Risk of Value) का सबसे बेसिक फॉर्म माना जाता है। यह पॉलिसी आपके सामान को केवल 'Catastrophic Events' (बड़ी या विनाशकारी घटनाओं) से बचाती है। इसका प्रीमियम (Premium) कम होता है।
- ✔ कवर होता है: यदि पूरा का पूरा ट्रक पलट जाए, खाई में गिर जाए, ट्रक में भीषण आग लग जाए, या पूरा ट्रक ही चोरी हो जाए।
- ❌ कवर नहीं होता: यदि ट्रक सही-सलामत आपके घर पहुँच गया, लेकिन अंदर रखा आपका टीवी टूट गया, डाइनिंग टेबल का शीशा चटक गया, या फ्रिज पर बड़ा डेंट आ गया, तो बेसिक ट्रांजिट इंश्योरेंस में इसका कोई क्लेम नहीं मिलेगा। इसमें लोडिंग/अनलोडिंग के दौरान हाथों से छूटकर टूटने वाले सामान का रिस्क कवर नहीं होता।
2. All Risk Insurance (व्यापक सुरक्षा कवर)
यह सबसे प्रीमियम और सुरक्षित पॉलिसी है। अगर आप अपने महंगे घरेलू सामान (Household Goods) की 100% सुरक्षा चाहते हैं, तो हमेशा All Risk Insurance लेना चाहिए। इसका प्रीमियम बेसिक से थोड़ा अधिक होता है, लेकिन यह आपको मानसिक शांति (Peace of Mind) देता है।
- ✔ कवर होता है: ट्रक के पलटने या आग लगने जैसी बड़ी घटनाओं के साथ-साथ, कस्टम डैमेज (Individual Item Damage) भी कवर होता है। जैसे: लोडिंग करते समय वाशिंग मशीन का गिर जाना, सफर के झटकों से टीवी की स्क्रीन (LED Panel) का क्रैक हो जाना, या महंगे सोफे/फर्नीचर का बुरी तरह टूट जाना।
📊 Basic Transit (ROV) vs All Risk Insurance (चार्ट द्वारा समझें)
अपने बजट और सामान की वैल्यू के अनुसार सही पॉलिसी चुनने के लिए नीचे दिए गए तुलनात्मक चार्ट (Comparison Chart) को ध्यान से पढ़ें:
| स्थिति / घटना (Scenario) | Basic Transit Insurance | All Risk Insurance |
|---|---|---|
| ट्रक का एक्सीडेंट होना या आग लगना | ✔ 100% कवर है | ✔ 100% कवर है |
| सामान सहित पूरा ट्रक चोरी होना | ✔ कवर है (FIR आवश्यक) | ✔ कवर है (FIR आवश्यक) |
| रास्ते के झटकों से LED TV का शीशा टूटना | ❌ कवर नहीं है | ✔ कवर है (प्रोफेशनल पैकिंग अनिवार्य) |
| लोडिंग के समय फ्रिज का गिरकर पिचक जाना | ❌ कवर नहीं है | ✔ कवर है |
| फर्नीचर पर हल्की खरोंच (Minor Scratches) | ❌ कवर नहीं है | ❌ कवर नहीं है (सामान्य टूट-फूट) |
| पैकिंग ग्राहक ने खुद की हो, और सामान टूट जाए | ❌ क्लेम रिजेक्ट | ❌ क्लेम रिजेक्ट |
📌 All Risk Insurance की अनिवार्य शर्तें (Mandatory Conditions)
भले ही आपने सबसे महंगी All Risk पॉलिसी ली हो, लेकिन इंश्योरेंस कंपनियां (Insurance Companies) क्लेम पास करने से पहले कुछ सख्त नियमों (Strict Parameters) की जांच करती हैं। क्लेम तभी अप्रूव (Approve) होगा जब निम्नलिखित शर्तें पूरी होंगी:
- ✔ व्यावसायिक पैकिंग (Professional Packing Mandatory): सामान की पैकिंग Sona Packers and Movers जैसी अधिकृत (Authorized) और प्रोफेशनल कंपनी द्वारा की जानी चाहिए। यदि आपने अखबारों (Newspapers) या पुराने डिब्बों में सामान खुद पैक किया है, तो इंश्योरेंस कंपनी यह मान लेगी कि नुकसान आपकी खराब पैकिंग के कारण हुआ है।
- ✔ नुकसान ट्रांजिट के दौरान ही हुआ हो: कंपनी यह वेरीफाई करेगी कि डैमेज घर से सामान उठने (Origin) और नई जगह (Destination) पर डिलीवरी होने के बीच ही हुआ है।
- ✔ तुरंत रिपोर्टिंग (Immediate Reporting): जैसे ही आपके घर सामान अनलोड (Unload) हो, और आपको टीवी या फ्रिज टूटा हुआ मिले, तो आपको Delivery Receipt (LR Copy) पर "Goods Received as Damaged" (सामान टूटा हुआ मिला) लिखना अनिवार्य है। इसके बाद 24 से 72 घंटे के अंदर इंश्योरेंस कंपनी को लिखित मेल या कॉल करना आवश्यक है।
- ✔ सबूत और निरीक्षण (Evidences & Survey): टूटे हुए सामान को तब तक रिपेयर (Repair) न कराएं, न ही उसके पैकिंग मटेरियल को फेंकें, जब तक कि कंपनी का सर्वेयर (Surveyor) आकर नुकसान का मुआयना (Inspection) न कर ले।
🚫 आम Exclusions (क्या कभी कवर नहीं होता?)
हर इंश्योरेंस पॉलिसी में कुछ "Exclusions" (अपवाद) होते हैं। यह जानना आपके लिए सबसे ज्यादा ज़रूरी है कि इंश्योरेंस कंपनी किन परिस्थितियों में क्लेम देने से साफ इंकार (Reject) कर सकती है। इसे विस्तार से समझें:
❌ पहले से मौजूद खरोंच (Pre-existing Damage)
यदि आपके बेड या सोफे पर पहले से कोई स्क्रैच था, और आप नई जगह जाकर उसे क्लेम करने की कोशिश करते हैं, तो कंपनी उसे नकार देगी। शिफ्टिंग से पहले हमारे सुपरवाइज़र द्वारा एक 'Pre-Move Survey' (इन्वेंट्री लिस्ट) बनाई जाती है जिसमें सामान की मौजूदा स्थिति दर्ज होती है।
❌ सामान्य घिसावट (Normal Wear & Tear)
समय के साथ सामान पुराना होता है। पुराने फर्नीचर की लकड़ी का हल्का दरकना, सोफे के कपड़े का रंग फीका पड़ जाना, या पुरानी पॉलिश का उखड़ना ट्रांजिट डैमेज नहीं माना जाता। यह उम्र (Ageing) का असर है, जिस पर कोई क्लेम नहीं मिलता।
❌ आंतरिक या इलेक्ट्रॉनिक खराबी (Mechanical Derangement)
यह सबसे बड़ा विवाद का कारण है। मान लीजिए आपका फ्रिज सही-सलामत बिना किसी डेंट के नए घर पहुँच गया। बाहर से कोई डैमेज नहीं है, पैकिंग भी सही थी। लेकिन प्लग लगाने पर वह ऑन नहीं हो रहा है (कंप्रेसर फॉल्ट)। इसे मैकेनिकल फॉल्ट कहते हैं, और बिना बाहरी डैमेज के इंश्योरेंस इसे कवर नहीं करता।
❌ नमी, फफूंदी या जलवायु परिवर्तन (Moisture / Climate)
यदि मानसून के दौरान शिफ्टिंग हो रही है और हवा की नमी (Humidity) के कारण आपके लेदर के सोफे पर फफूंदी (Fungus) लग जाती है या लोहे के टेबल पर जंग (Rust) आ जाती है, तो इसे प्राकृतिक कारण (Act of God / Natural cause) मानकर क्लेम से बाहर रखा जाता है।
💰 क्लेम पास होने पर कितना पैसा मिलता है? (Payout Calculation)
ग्राहकों को लगता है कि अगर 1 लाख का टीवी टूट गया, तो इंश्योरेंस कंपनी तुरंत 1 लाख रुपये खाते में डाल देगी। वास्तव में, इंश्योरेंस का उद्देश्य आपको नया सामान दिलाना नहीं, बल्कि आपके 'आर्थिक नुकसान की भरपाई' (Indemnification) करना होता है। आइए एक उदाहरण (Example) से गणित को समझते हैं:
परिदृश्य (Scenario) 1: टीवी का रिपेयर होना (Partial Damage)
- आपने फॉर्म में टीवी की कीमत बताई (Declared Value): ₹40,000
- रास्ते में नुकसान: टीवी का मदरबोर्ड टूट गया या स्क्रीन का फ्रेम डैमेज हो गया।
- कंपनी के सर्विस सेंटर ने रिपेयर का एस्टीमेट दिया (Repair Cost): ₹8,000
- इंश्योरेंस कंपनी का भुगतान: सर्वेयर के अप्रूवल के बाद, इंश्योरेंस कंपनी आपको ₹8,000 (पॉलिसी की शर्तों और मामूली फाइल चार्ज/Deductible काटने के बाद) का भुगतान करेगी, ताकि आप अपना टीवी ठीक करा सकें।
परिदृश्य (Scenario) 2: टीवी का पूरी तरह नष्ट होना (Total Loss)
- यदि ट्रक पलट गया और आपका टीवी पूरी तरह चूर-चूर हो गया (Beyond Repair)।
- क्या आपको पूरे ₹40,000 मिलेंगे? नहीं।
- कंपनी टीवी की उम्र (Age) देखेगी। यदि टीवी 3 साल पुराना है, तो कंपनी उस पर Depreciation (मूल्यह्रास / घिसावट का प्रतिशत) काटेगी। मान लीजिए 30% डिप्रिसिएशन काटा गया, तो आपको 40,000 - 12,000 = ₹28,000 का भुगतान किया जाएगा (जब तक कि आपने 'Zero Dep' या 'Replacement Value' पॉलिसी न ली हो)।
🤯 ग्राहकों की सबसे बड़ी गलतफहमी (The Biggest Misconception)
"मैंने इंश्योरेंस का पैसा दिया है, तो एक छोटी सी खरोंच का भी क्लेम लूंगा!"
पैकर्स एंड मूवर्स इंडस्ट्री में यह ग्राहकों की सबसे बड़ी गलतफहमी है। आपको यह समझना होगा कि आपका घर शिफ्ट हो रहा है, कोई फैक्ट्री से नई कार नहीं आ रही है। भारी-भरकम फर्नीचर (जैसे 100 किलो की अलमारी या बड़ा डाइनिंग टेबल) को सीढ़ियों से उतारने, ट्रक में लादने, 1000 किलोमीटर का सफर तय करने और नए घर में सेट करने में मामूली खरोंच, हल्की पॉलिश का खराब होना, या कोनों (Edges) का हल्का सा दब जाना (Minor Dents) अत्यंत सामान्य (Very Normal) है।
अधिकांश Transit Insurance और All Risk पॉलिसियां इन Cosmetic Damages (दिखावटी या मामूली खरोंचों) को क्लेम योग्य नहीं मानतीं। इंश्योरेंस का असली मक़सद आपको बड़े झटके (Major Financial Loss) से बचाना है, जैसे टीवी का टूटना, एसी का डैमेज होना, या फर्नीचर का दो टुकड़ों में बंट जाना।
🤝 Sona Packers & Movers की भूमिका (Our Legal Role)
कई ग्राहकों को लगता है कि अगर सामान टूटा, तो पैकर्स एंड मूवर्स (Transport Company) अपनी जेब से पैसा भरेंगे। यह एक कानूनी तथ्य (Legal Fact) है कि कोई भी ट्रांसपोर्टर क्लेम का पैसा अपनी जेब से नहीं देता। हम एक ट्रांसपोर्ट कंपनी हैं, इंश्योरेंस कंपनी नहीं। हमारा काम और जिम्मेदारी नीचे दिए गए बिंदुओं तक सीमित है:
- हम सुरक्षित शिफ्टिंग करते हैं: हमारी 100% कोशिश होती है कि हम बेस्ट पैकिंग मटेरियल (Bubble wrap, corrugated sheets) और एक्सपर्ट लेबर का इस्तेमाल करके आपके सामान को बिना खरोंच के पहुँचाएं।
- हम डाक्यूमेंट्स (Legal Papers) देते हैं: यदि दुर्भाग्य से कोई नुकसान होता है, तो Sona Packers and Movers आपको क्लेम फाइल करने के लिए सभी ज़रूरी और लीगल पेपर्स (जैसे- Lorry Receipt, Damage Certificate, Bilty Copy, Survey facilitation) तुरंत उपलब्ध कराएंगे।
- क्लेम ग्राहक को खुद करना होता है: इंश्योरेंस पॉलिसी ग्राहक के नाम (Consignor/Consignee) पर जारी होती है। इसलिए कंपनी के नियमों के अनुसार, क्लेम फॉर्म भरना, डैमेज की फोटो भेजना और सर्वेयर से बात करना ग्राहक की स्वयं की जिम्मेदारी (Customer's Liability) होती है। पैसा भी सीधे ग्राहक के ही बैंक खाते (Bank Account) में आता है।
हम आपके क्लेम प्रोसेस (Claim Process) में आपका पूरा सहयोग (Full Support) करेंगे, ताकि आपको आपका हक़ और पैसा बिना किसी परेशानी के मिल सके।
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